यूपी सरकार में नौकरी नहीं मिलने पर EWS महिलाएं पहुंचीं SC, क्यों बोला कोर्ट- नहीं कर सकते दावा

यूपी सरकार में नौकरी नहीं मिलने पर EWS महिलाएं पहुंचीं SC, क्यों बोला कोर्ट- नहीं कर सकते दावा


सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) श्रेणी के तहत आरक्षण का अनुरोध करने वाले कई उम्मीदवारों की याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट का कहना है कि अमान्य आय प्रमाण पत्र इस तरह के लाभ का दावा करने का आधार नहीं हो सकते हैं.

पूनम द्विवेदी और अन्य उम्मीदवारों ने ये याचिकाएं दाखिल की थीं. इन याचिकाओं में इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनकी दलील को खारिज कर दिया गया था. हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले बेंच ने कहा कि भर्ती नियमों के अनुसार, उम्मीदवार संबंधित वित्तीय वर्ष के लिए वैध ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने में विफल रहे.

कोर्ट ने कहा, ‘अगर अपीलकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत प्रमाण पत्र आवेदन के वर्ष से पूर्व के वित्तीय वर्ष से संबंधित नहीं थे और संबंधित वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले ही जारी किए गए थे, तो उन प्रमाण पत्रों में स्पष्ट त्रुटि थी.’

आदेश में कहा गया, ‘इसलिए, हमारी राय में, उन प्रमाणपत्रों के आधार पर अपीलकर्ताओं के दावे को उचित तौर पर खारिज किया गया.’ यह मामला राज्य में महिला स्वास्थ्य कर्मियों के 9,000 से अधिक पदों की भर्ती से जुड़ा है, जहां ईडब्ल्यूएस श्रेणी के तहत आवेदन करने वाली कुछ उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा पास करने के बावजूद अंतिम लिस्ट से बाहर कर दिया गया था.

उम्मीदवारों ने दलील दी कि उनके प्रमाणपत्रों में विसंगतियां इसे जारी करने वाले अधिकारियों की त्रुटियों और लागू वित्तीय वर्ष के संबंध में भ्रम के कारण हुईं. इस दलील को खारिज करते हुए, बेंच ने कहा कि प्रमाण पत्र या तो संबंधित वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले जारी किए गए थे या गलत अवधि से संबंधित थे.

बेंच ने कहा, ‘इस अदालत की राय है कि जब किसी विशेष वित्तीय वर्ष के संबंध में प्रमाण पत्र मांगा जाता है, तो किसी और वित्तीय वर्ष का प्रमाण पत्र उम्मीदवार की पात्रता का मूल आधार होता है.’ कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ उठाने के लिए, आय और संपत्ति का प्रमाण पत्र आवेदन के वर्ष से पहले के वित्तीय वर्ष से संबंधित होना चाहिए और ‘कट-ऑफ’ तिथि तक वैध होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि उम्मीदवार गलत प्रमाण पत्र जारी करने के लिए अधिकारियों को दोषी नहीं ठहरा सकते, खासकर तब जब उनमें से अधिकांश ने विज्ञापन जारी होने से पहले ही दस्तावेज प्राप्त कर लिए थे और पात्रता शर्तों के अनुपालन में नए प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकते थे.

 

यह भी पढ़ें:-
PM मोदी ने महिलाओं को लिखा पत्र, बताया देश की प्रगति का आधार, बोले – जल्द पारित होगा आरक्षण बिल

.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *