भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन के लिए 2026 टी20 वर्ल्ड कप किसी सुनहरे सपने से कम नहीं गुजरा है. ईशान ने इस विश्व कप में 317 रन बनाए. इस दौरान उनके बल्ले से 33 चौके और 18 छक्के निकले. भारत के टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीतने में ईशान किशन का अहम रोल रहा है, लेकिन वर्ल्ड कप के आगाज से कुछ दिन पहले तक वह सीन में कहीं भी नहीं थे. अचानक न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में उनकी टीम में एंट्री हुई थी. अब ईशान ने भारत के चौंपियन बनने के बाद बड़ा रोज खोला है.
न्यूजीलैंड को रविवार रात फाइनल में 96 रन से हराकर भारत की खिताबी जीत के बाद मुस्कुराते हुए ईशान किशन ने कहा, “सूर्या भाई ने मुझे तब फोन किया जब टीम घोषित होने वाली थी. मैंने स्क्रीनशॉट भी ले लिया, क्योंकि मुझे लग रहा था कि उन्होंने विश्व कप टीम के बारे में फोन किया है. उन्होंने मेरे से सीधे पूछा, ‘विश्व कप जिताएगा? मैंने उनसे पूछा, ‘भरोसा करोगे?’ उन्होंने कहा ‘हां’ और बस इतनी ही बात हुई.”
फाइनल से पहले की रात ईशान किशन के लिए आसान नहीं थी. वह एक बहुत बड़ी निजी त्रासदी से जूझ रहे थे. ईशान ने बताया कि उन्हें कुछ दिन पहले ही एक दुर्घटना में अपनी रिश्ते की बहन की मौत के बारे में पता चला था. यह एक ऐसी खबर थी जो टूर्नामेंट के सबसे बड़े मुकाबले से पहले उनके दिमाग में बार-बार आ रही थी.
ईशान ने कहा, सच कहूं तो मैच से पहले मैं इस संबंध में बात करने के बारे में नहीं सोच रहा था लेकिन मैं कहूंगा. मेरी रिश्ते की बहन की कार दुर्घटना में मौत हो गई और मुझे कुछ दिन पहले इसके बारे में पता चला. वह हमेशा चाहती थी कि मैं काफी रन बनाऊं. कल मैं अच्छा महसूस नहीं कर रहा था, लेकिन आज एक बड़ा दिन था, इसलिए अपनी भावनाओं को मैच से ऊपर रखने के बजाय मैंने सोचा कि सबसे अच्छी चीज जो मैं कर सकता हूं वह उसके लिए रन बनाना है.
इशान ने कहा कि अर्धशतक बनाने के बाद उन्हें राहत मिली कि वह अपनी दिवंगत बहन के लिए यह कर पाए. उन्होंने कहा, “जब मैंने अर्धशतक बनाने के बाद ऊपर देखा तो वह उसके लिए था. मुझे बहुत गर्व है कि हम आज जीते. मुझे उसके परिवार के लिए दुख हो रहा है लेकिन मेरे करीबी दोस्त उनका ख्याल रखने के लिए वहां हैं.”
ड्रेसिंग रूम के माहौल को लेकर ईशान किशन ने कहा, “विश्व कप हमेशा एक बहुत बड़ा मंच होता है. दबाव और घबराहट होती है, लेकिन यहां काम साफ है, आपको बस सही शॉट चुनने हैं और चीजों को सामान्य रखना है. जब आप इसे सामान्य रखते हैं तो खिलाड़ी के लिए यह आसान हो जाता है. कोच और कप्तान ने सभी को आजादी दी और खिलाड़ियों पर कभी शक नहीं किया. जब आपको वह समर्थन मिलता है तो आप खुद खेल बदलना चाहते हैं.”
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