अमीनुल इस्लाम बुलबुल बीसीबी अध्यक्ष पद से हटाए गए, भारत से विवाद है वजह!

अमीनुल इस्लाम बुलबुल बीसीबी अध्यक्ष पद से हटाए गए, भारत से विवाद है वजह!


बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) के भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) से द्विपक्षीय संबंधों को फिर से शुरू करने का अनुरोध किए जाने के कुछ ही दिन बाद देश की राष्ट्रीय खेल परिषद (एनएससी) ने पूर्व कप्तान और बीसीबी के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम बुलबुल को मंगलवार को पद से हटा दिया. नए चुनाव होने तक बोर्ड के दैनिक कामकाज को चलाने के लिए तदर्थ समिति का गठन किया है.

बीसीबी के सूत्रों के अनुसार बुलबुल को मुख्य रूप से टी20 विश्व कप के दौरान हुए विवाद के कारण हटाया गया. उस समय तत्कालीन अंतरिम सरकार के सलाहकार आसिफ नजरुल ने पूर्व कप्तान को एक तरह से अपने काबू में कर लिया था और राष्ट्रीय टीम को इस वैश्विक प्रतियोगिता के लिए भारत जाने की अनुमति नहीं दी थी.

भारत-विरोधी कट्टरपंथी नजरुल का रुख यह था कि आईपीएल से मुस्ताफिजुर रहमान को हटाए जाने के विरोध के तौर पर बांग्लादेश के टी20 विश्व कप के मुकाबलों को कोलकाता और मुंबई से हटाकर श्रीलंका में स्थानांतरित कर दिया जाए.

इस पूरे मामले के दौरान बुलबुल केवल मूक दर्शक बने रहे और पिछले कुछ दिनों में उनके कारण बीसीबी के छह निदेशकों ने इस्तीफा दे दिया.

बांग्लादेश के पूर्व कप्तान और देश के महानतम सलामी बल्लेबाज तमीम इकबाल को 11 सदस्यीय तदर्थ का प्रमुख बनाया गया है. इस समिति की जिम्मेदारी अगले 90 दिन के भीतर क्रिकेट बोर्ड के चुनाव करवाना है.

बुलबुल ने चुने हुए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को भंग करने और तदर्थ समिति के गठन को गैरकानूनी बताया. वह अपनी बात पर अड़े रहे और जोर देकर कहा कि बीसीबी के एकमात्र वैध अध्यक्ष वही हैं जब तक कि उच्च न्यायालय कोई और फैसला नहीं दे.

बुलबुल ने बयान में कहा, ‘‘चुने हुए बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को भंग करने का फैसला और तमीम इकबाल की अगुवाई वाली तदर्थ समिति को थोपना एक संवैधानिक तख्तापलट है. यह कार्रवाई गैरकानूनी है, बीसीबी के संविधान के दायरे से बाहर है और सरकारी दखलअंदाजी को लेकर आईसीसी के नियमों का सीधा उल्लंघन है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘एनएससी के पास किसी चुने हुए निकाय को भंग करने का कोई अधिकार नहीं है, सिवाय एनएससी अध्यादेश में बताई गई बेहद गंभीर परिस्थितियों के जिनमें से कोई भी स्थिति यहां मौजूद नहीं है. तदर्थ समिति एक दिखावटी संस्था है। हम इसके अधिकार को नहीं मानते और हम आईसीसी से अपील करते हैं कि वह तुरंत इस मामले को देखे और इस गैरकानूनी संस्था को काम करने की इजाजत नहीं दे.’’

बुलबुल ने छह अक्टूबर 2025 को हुए बीसीबी चुनावों के संबंध में भ्रष्टाचार, हेरफेर या सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों को साफ तौर पर नकार दिया. उन्होंने कहा कि चुनाव पूरी तरह से वैध थे और तीन सदस्यीय चुनाव आयोग द्वारा पूरी पारदर्शिता के साथ कराए गए थे जिसे बीसीबी ने छह सितंबर 2025 को बनाया था. इस आयोग में बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मोहम्मद हुसैन मुख्य चुनाव आयुक्त थे.

बुलबुल ने कहा, ‘‘यह प्रक्रिया बीसीबी के संविधान के तहत पूरी तरह से अनुरूप थी. उठाई गई आपत्तियों पर 24-25 सितंबर 2025 को अर्ध-न्यायिक सुनवाई के जरिए उचित रूप से सुनवाई की गई और उनका समाधान किया गया.’’

एनएससी के निदेशक अमीनुल एहसान के अनुसार बीसीबी के मौजूदा बोर्ड को भंग करने और तदर्थ समिति गठित करने के फैसले की सूचना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) को दे दी गई है.

हालांकि आईसीसी के नियम बोर्ड के मामलों में सरकार या किसी बाहरी संस्था के हस्तक्षेप की अनुमति नहीं देते लेकिन फिर भी इस बात की संभावना कम ही है कि यह वैश्विक संस्था बीसीबी पर प्रतिबंध लगाएगी क्योंकि एनएससी द्वारा चुनाव कराने के लिए समय सीमा पहले ही घोषित की जा चुकी है.

तमीम की अध्यक्षता वाली तदर्थ समिति में अतर अली खान, रश्ना इमाम, मिर्जा यासिर अब्बास, सैयद इब्राहिम अहमद, मिन्हाजुल अबेदिन नानू, इशराफिल खुसरो, तंजीम चौधरी, सलमान इस्पहानी, रफीकुल इस्लाम और फहीम सिन्हा शामिल हैं.

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